गन्ने की नई प्रजाति आठ माह में पककर होगी तैयार: सहायक निदेशक

गन्ने की नई प्रजाति आठ माह में पककर होगी तैयार: सहायक निदेशक

गन्ने की नई प्रजाति आठ माह में पककर होगी तैयार: सहायक निदेशक

गन्ने की नई प्रजाति आठ माह में पककर होगी तैयार: सहायक निदेशक

कुशीनगर(एपीआई एजेंसी):- उत्तर प्रदेश में गन्ने की औसत उपज 839 कुन्तल प्रति हेक्टेयर है। गन्ने की उत्पादकता एवं चीनी परता बढ़ाने के लिए शासन द्वारा कई योजनाए संचालित किया जा रहा है। गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय केन्द्र- करनाल हरियाणा ने गन्ने की ऐसी प्रजाति विकसित की है जो 8 माह में पक कर पेराई के लिए तैयार हो जाती है। इस प्रजाति की उत्पादन क्षमता को. 0238 प्रजाति से अधिक है। गन्ना मोटा तथा चीनी परता भी अधिक है। इस प्रजाति का नाम है को. 15023। यह जानकारी उ० प्र० गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केन्द्र-पिपराइच गोरखपुर के सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने दी।

सहायक निदेशक गुप्ता उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील गन्ना कृषको के साथ प्रशिक्षण लेकर गन्ना प्रजनन संस्थान करनाल हरियाणा से लौटे हैं। सहायक निदेशक ने उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गन्ने की उपज एवं चीनी परता देने व किसान एवं चीनी उद्योग की आर्थिक दशा मजबूत करने वाली प्रजाति को. 0238 के जनक पद्मश्री डा. बक्शी राम से 8 माह में पेराई के लिए तैयार होने वाली प्रजाति को. 15023 के विषय में बात की। जानकारी देते हुए डॉ0 बवशी राम ने बताया कि यह गन्ना को 0238 से अधिक मोटा, ठोस तथा वजनदार है। इस किस्म की पोरिया आकर्षक, हल्के पीले रंग की लम्बी, कम मोम वाली होती है।

उत्तर भारत में अब तक जितनी प्रजाति विकसित हुई है, सर्वाधिक चीनी देने वाली यह प्रजाति है। इस प्रजाति को अपना कर चीनी मिले 15 से 20 दिन पहले मध्य अक्टूबर में पेराई कर सकती हैं। औसत उपज 890 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। कुछ किसान से 600 से 700 कुंतल प्रति एकड़ उपज ले रहे हैं। को. 15023 का चीनी परता गन्ने में शर्करा प्रतिशत 14.93% है तथा रस में शर्करा प्रतिशत 19.41% है। इस प्रजाति को जल भराव वाले खेतों में बुवाई ना करें। 15 मार्च के बाद देर से बुवाई करें। ग्राम पड़री पिपरपाती में किसान के खेत पर रिंग विधि से बोया गया है, सहायक निदेशक ने देखा।सहायक निदेशक ने कहा कि 8 माह में पेराई के लिए तैयार होने वाली प्रजाति को. 15023 के ब्रीडर जनक डॉ रविंद्र कुमार के साथ करनाल शोध प्रक्षेत्र पर जाकर देखा।

एक गन्ने का वजन 3 से 4 किलोग्राम था। गन्ना बहुत मुलायम था मोटा, ठोस, खड़ा था। सहायक निदेशक ने कृषक अध्ययन यात्रा कार्यक्रम में दक्षिण भारत एवं उत्तर भारत के गन्ना उत्पादक राज्यों का भ्रमण एवं प्रशिक्षण लेने के उपरांत पूर्वांचल के गन्ना किसानो को संदेश दिया- किसान गन्ने की एक प्रजाति पर निर्भर न रहे, चाहे जितनी अच्छी हो। गन्ने की ट्रेंच विधि से बुवाई करें समय की मांग है पेड़ी गन्ना फसल पर विशेष ध्यान दें। तीन से चार प्रजातियां बोंए उसका अपने खेत पर उपज देखें कृषि यंत्रों का प्रयोग जरूर करें।

गन्ने की अगेती तथा सामान्य प्रजातियों में संतुलन बनाए। इस समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने का कैंसर रोग "लाल सड़न" महामारी का रूप ले लिया है। सभी बड़ी चीनी मिलें पिछले वर्ष की तुलना में 25 से 40 लाख कुंतल गन्ना कम पेरकर पहले बंद हो रही हैं। फसल चक्र अपनाये, ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करें। गन्ने के वैज्ञानिक खेती पर 25000 कृषकों को प्रशिक्षण दे रहा है गन्ना किसान संस्थान विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है। गन्ने की सूखी पत्ती न जलाएं, सहफसली खेती करें।